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लघु कथा - 'सच्चा सेवक'

Posted On: 13 Jun, 2017 में

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रात के दस बजे थे। दीपेन्द्र खाना खा कर अपने बंगले के पीछे बने पार्क में टहल रहा था। तभी नौकर दौड़ा-दौड़ा आया ओर सूचना दी कि मंत्री महोदय का फोन आया हुआ है लैंडलाइन पर, वह होल्ड पर हैं। दीपेन्द्र तुरन्त फोन सुनने बंगले में गया। फोन पर मंत्री महोदय ने आदेशात्मक रूप कोई सूचना दीपेन्द्र को दी। कुछ ही देर में फैक्स पर एक लिस्ट भी आ पहुंची।
दरअसल दीपेन्द्र एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं। उनकी युनिवर्सिटी में क्लर्कों की भर्ती के लिए अगले दिन साक्षात्कार होने हैं। मंत्री जी का वह फोन इसी भर्ती से संबंधित था। लिस्ट में उन लोगों के नाम थे जिन्हें भर्ती किया जाना है। लिस्ट देख कर दीपेन्द्र के चेहरे पर एक पल के लिए परेशानी की रेखाएं उभरी लेकिन दूसरे ही पल वह मन्द-मन्द मुस्काया। अपने मोबाइल पर एक संदेश टाइप कर किसी को भेजकर वह पार्क में फिर से टहलने निकल गया। टहलते-टहलते दो साए उसके पास आए कोई पांच मिनिट बातचीत की और वह दोनों चले गए। दीपेन्द्र भी घर में आकर आराम से सो गया।
प्रातः काल आॅफिस टाइम से पहले ही आफिस के सामने साक्षात्कार देने वालों की भीड़ लग चुकी थी। दीपेन्द्र आफिस पहुंचा ओर उसने साक्षात्कार शुरू करने के लिए कहा। अभी पहले साक्षात्कार देने वाले का नाम पुकारा ही गया था, कि स्टूडेंट यूनियनों के प्रधान अपने साथियों के साथ आ धमके। उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। साक्षात्कार प्रक्रिया रुक गयी। छात्रों का हंगामा जोर पकड़ता जा रहा था। तभी मीडिया कर्मी भी आ पहुंचे। हंगामा टीवी चैनलों पर लाईव हो गया।
हंगामें की यह खबर मंत्राी जी तक भी पहुंच गयी। मंत्री जी ने कुलपति महोदय दीपेन्द्र जी को फोन किया। घटना की सारी जानकारी मांगी। कुलपति महोदय ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा
‘मंत्री जी! मैं तो आपका सच्चा सेवक हूँ। परन्तु क्या करूं न जाने कैसे इन छात्र यूनियनों को इस साक्षात्कार के बारे में भनक लग गयी। आदेश करें मैं अब क्या करूँ?’
‘आप तुरन्त प्रभाव से साक्षात्कार रोक दो। इन छात्रों को किसी तरह समझा कर शान्त करो। छात्रों के सामने हमें किसी तरह का कोई जोखिम नहीं लेना है।’ यह कह कर मंत्री जी ने फोन काट दिया|
फोन पर वार्तालाप खत्म होने के बाद दीपेन्द्र के मुखमण्डल पर एक कुटिल मुस्कान तैर गयी।

विजय ‘विभोर’
व्हाट्सएप 9017121323
ईमेल vibhorvijayji@gmail.com



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